प्यार, इश्क और मोहब्बत
… यह शब्द हमने काफी सुने और पढ़े हैं, लव स्टोरीज पे
आधारित मूवीज भी देखी हैं | मुझसे अक्सर यह सवाल पूछते है की “मैं आपना रिश्ता सफल कैसे बनाऊँ?”
या “मैं डेटिंग में सफल कैसे हूँ?” आओ जाने इसके जवाब।
डेटिंग करने से पहले ये बातें
ध्यान रखें
● यदि आप अभी स्कूल में हैं या 18 वर्ष से कम
आयु के हैं तो आप डेटिंग के लिए तैयार नहीं है। वो इसलिए क्योंकि इस उम्र में आप जिस
तरह की गर्ल्फ़्रेंड या बॉफ़्रेंड को पसंद करते हैं, वो शायद आप बड़े होकर न करें।
अभी आप ज़िन्दगी को समझ रहे होते हैं और आपकी पसंद और नापसंद आगे चलकर ज़रूर बदलेगी।
●
सिर्फ अकेलापन दूर करने के लिए या सेक्स और मज़े के लिए डेटिंग भी गलत है क्योंकि
इसके भी बुरे परिणाम होते हैं। इन् कारणों के लिए डेटिंग करने से पहले आप ये सोचिये – मुझे कैसा लगेगा यदि
कोई मेरा इस्तेमाल सिर्फ सेक्स और मज़े के लिए या सिर्फ अकेलापन दूर करने के लिए करेगा?
●
यदि आप जल्द ही शादी का सोच रहे हैं, आप ज़िमेदारी लेने से नहीं कतराते हैं
और आपको पूरा यकीन है की आप अब एक साथी के साथ अपने जीवन को बाँटने की इच्छा रखते हैं
तब आप डेटिंग के लिए तैयार हैं।
● यदि आप उसे इतना जानते हैं की आप उसे अपने भावी
जीवन साथी के तौर पर देखते हैं और डेटिंग उसे और भी जान ने के लिए करना चाहते हैं,
तब आप डेटिंग के लिए तैयार हैं।
क्या तुम नहीं जानते की तुम्हारा
शरीर ईश्वर का मंदिर है और ये की ईश्वर के आत्मा इस मंदिर में रहती है? 1 कुरिन्थियों
3: 16
दोस्तों बाइबिल जिस ईश्वर के बारे में बताती
है वह आपकी ज़रूरतों को समझता है। ऐसा नहीं है की वो डेटिंग या सेक्स के खिलाफ है।
लेकिन ये वो परमेश्वर है जो चाहता है की आप अपने जीवन के हर चीज़ का भरपूर आनंद लें।
इसके लिए ज़रूरी है की आप उसकी आज्ञा मानें और उस पर भरोसा रखें की वो आपको वो सब देगा
जिसके आप सपने देखते हैं।
फ़िल्मी प्यार
“प्यार दोस्ती है। अगर वह मेरी सबसे
अच्छी दोस्त नहीं बन सकती तो मैं उससे प्यार कर ही नहीं सकता। सिंपल!” “कुछ कुछ होता
है” का यह डाइयलोग हम सब ने तो सुना ही होगा। फ़िल्मों में हम जो हैपी एंडिंग देखते
हैं क्या असली जीवन में यह मुमकिन है? क्या वाकई में प्यार यह है जो फिल्मों मे बताया
जाता है।
प्रेम का मतलब तो आजकल ऐसा हो गया जो
लोग अपना मतलब पूरा करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। मतलब पूरा तो प्यार खत्म। क्या
यह प्यार है? अगर यह प्यार नहीं तो फिर प्यार है क्या? और प्यार का मतलब क्या है और सच्चा प्यार क्या
है?
प्यार की परिभाषा
1 कुरान्थियों 13:4-8 “प्रेम धीरजवन्त
है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म
से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब
बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। प्रेम
कभी टलता नहीं;”
प्यार शब्द काफी छोटा और साथ ही काफी
गहरा भी है | प्यार की यह गहराई, रिश्ते में समय के साथ आती है | प्यार का मीठा फल चाहिए तो इंतज़ार
और सब्र से रिश्ता आगे बढ़ाना होगा | प्यार और आकर्षण के बारें में और जानने के लिए
हमसे बात करें | आओ चलें प्यार की नयी मंजिल पे ! https://www.nayimanzil.com/

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